बुधवार, 31 मार्च 2010

राजनीति में अनुलोम-विलोम

                                         योग गुरु बाबा रामदेव ने लोगों को स्वांस लेना और छोरना 
सिखाने के बाद अब राष्ट्रवादी राजनीति सिखाने का संकल्प लिया है. उनका आगामी
राजनैतिक कपालभाती भारतीय राजनीति में क्या गुल खिलायेगा यह तो समय के
गर्भ में है ? लेकिन यह निर्णय  इतना तो बता ही जाता है की राजसत्ता से सहयोग
लेते-लेते वह इतना अधिक सजग  हो गए हैं कि अब वह खुद ही एक राजनैतिक  
दल बनाने की घोषणा कर चुके हैं. हाँ अभी उनमे थोरी सी झिझक बाकी है कि वह
शिव सेना के बाल ठाकरे कि तरह कोई पद न लेने कि बात तो जरूर कह रहे हैं, 
लेकिन इस सम्भावना से तो इंकार नहीं ही किया जा सकता है की उनके द्वारा खरे 
किये उम्मीदवार की वजह से वह अगर राजनैतिक मोल-जोल की स्थिति में पहुँच 
गए तो वह राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के मुखिया तो बन ही सकते हैं. 



 
                                              

                                                         जय हिंद , जय भारत , जय जनता


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